देवियों और सजà¥à¤œà¤¨à¥‹à¤‚,आइठआइठयहाठपर बाज़ार लगा है,जहाठसब कà¥à¤› बिकता है।चमकीले लिबासों में सजा,यहाठसब कà¥à¤› मिलता है।यहाठहर चीज़ की कीमत है,बस चà¥à¤•ाने वाला चाहिà¤à¥¤à¤¦à¤¿à¤² को बड़ा कर बोली लगाइà¤,फिर कीमत चà¥à¤•ाइà¤,और घर ले जाइà¤à¥¤à¤¯à¤¹à¤¾à¤ इंसान बिकते हैं,और उनके अरमान à¤à¥€,ज़मीर खरीदे बेचे जाते हैं।कीमत मिलने का वायदा मिले,तो जज़à¥à¤¬à¤¾à¤¤ à¤à¥€ बिक जाते हैं।ये बाज़ार बड़ा ज़ालिम है बाबू,जो दिखता है बस वही बिकता है।यहाठजंगल का कानून है लागू,जो गिरा पड़ा है,वो रौंद दिया जाता है।इसकी हवा में à¤à¤• नशा है,जो यहाठआता है,वो धà¥à¤¤ हो जाता है।संयम और समà¤à¤¦à¤¾à¤°à¥€ से ही,इस से बचा जा सकता है।-पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‚ष गरà¥à¤— Pratyush Garg१६-११-२००९ 16-11-2009