गज़ब कानून..१...आतंकके ख़िलाफ़ जंग..इस ज़रूरी संसà¥à¤®à¤°à¤£ को लिखना चाहती हूà¤...वजह है अपने१५० साल पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡, इंडियन à¤à¤µà¤¿à¤¡à¥‡à¤‚स à¤à¤•à¥à¤Ÿ,(IEA) कलम २५ और २ॠके तहेत बने कानून जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बदल ने की निहायत आवशà¥à¤¯à¤•ता है....इन क़ानूनों के रहते हम आतंकवाद से निगडित या अनà¥à¤¯ तसà¥à¤•रीसे निजाद पाही नही सकते...इन क़ानूनों मेसे à¤à¤• क़ानून के परिणामों का , किसीने आà¤à¤–ों देखा सतà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ कर रही हूà¤.....CHRT( कॉमनवेलà¥à¤¥ हà¥à¤¯à¥à¤®à¤¨ राइटà¥à¤¸ इनिशियेटिव .....Commonwealth Human Rights Initiative), ये संघटना 3rd वरà¥à¤²à¥à¤¡ के तहत आनेवाले देशों मे कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ है।इसके अनेक उदà¥à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ हैं । इनमेसे,निमà¥à¤²à¤¿à¤–ित अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ महतà¥à¤¤à¥à¤µ पूरà¥à¤£ है :अपने कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° मे reforms को लेके परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ जनजागृती की मà¥à¤¹à¥€à¤®, ताकि à¤à¤¸à¥‡ देशोंमे Human Rights की रकà¥à¤·à¤¾ की जा सके।ये संघटना, इस उदà¥à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¥€ के लिठअनेक चरà¥à¤šà¤¾ सतà¥à¤° ( सेमिनार) तथा debates आयोजित करती रहती है।à¤à¤¸à¥‡à¤¹à¥€ à¤à¤• चरà¥à¤šà¤¾ सतà¥à¤° का आयोजन,नयी देहली, २००२ की अगसà¥à¤¤ में, किया गया था। इस सतà¥à¤° के अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¥€à¤¯ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤ªà¥‡ उचà¥à¤šà¤¤à¤® नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯à¤•े ततà¥à¤•ालीन नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤§à¥€à¤¶ थे। ततà¥à¤•ालीन उप राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¥€, माननीय शà¥à¤°à¥€ à¤à¥ˆà¤°à¤µ सिंह शेखावत ( जो à¤à¤• पà¥à¤²à¤¿à¤¸ constable की हैसियतसे ,राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ मे कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ रह चà¥à¤•े हैं), मà¥à¤–à¥à¤¯ वकà¥à¤¤à¤¾ की तौरपे मौजूद थे।उकà¥à¤¤ चरà¥à¤šà¤¾à¤¸à¤¤à¥à¤° मे देशके हर à¤à¤¾à¤—से अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ उचà¥à¤š पदों पे कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ या अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ संवेदनशील कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ से तालà¥à¤²à¥à¤• रखनेवाली हसà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ मोजूद थीं : आला अखबारों के नà¥à¤®à¤¾à¤‡à¤‚दे, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤§à¥€à¤¶ ( अवकाश पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ या कारà¥à¤¯à¤°à¤¤) , आला अधिकारी,( पà¥à¤²à¤¿à¤¸, आईà¤à¤¸ के अफसर, अदि), वकील और अनà¥à¤¯ कईं। अपने अपने कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ के रथी महारथी। हर सरकारी महकमों के अधिकारियों के अलावा, अनेक गैर सरकारी संसà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¥€ à¤à¥€ वहाठहाज़िर थे। (NGOs)जनाब शेखावत ने विषयके मरà¥à¤®à¤•ो जिस तरहसे बयान किया, वो दिलो दिमाग़ को à¤à¤• à¤à¥‹à¤° देने की क़ाबिलियत रखता है।उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने, उचà¥à¤šà¤¤à¤® नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤²à¤¯ के नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤®à¥‚रà¥à¤¤à¥€( जो ज़ाहिर है वà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥à¤ªà¥€à¤ à¥à¤ªà¥‡ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¾à¤ªà¤¨à¥à¤¨ थे), की ओर मà¥à¤–ातिब हो, किंचित विनोदी à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥‡ कà¥à¤·à¤®à¤¾ माà¤à¤—ी और कहा,"मेरे बयान को नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ की तौहीन मानके ,उसके तहेत समनà¥à¤¸ ना à¤à¥‡à¤œ दिठजाà¤à¤!"बेशक, सपूरà¥à¤£ खचाखच à¤à¤°à¥‡ सà¤à¤¾à¤—ृह मे à¤à¤• हासà¥à¤¯ की लहर फ़ैल गयी !शà¥à¤°à¥€ शेखावत ने , कानूनी वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤•ी असमंजसता और दà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤•ा वरà¥à¤£à¤¨ करते हà¥à¤ कहा," राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ मे जहाà¤, मै ख़à¥à¤¦ कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ था , पà¥à¤²à¤¿à¤¸ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨à¥à¤¸ की बेहद लमà¥à¤¬à¥€ सीमायें होती हैं। कई बार १०० मीलसे अधिक लमà¥à¤¬à¥€à¥¤ इन सीमायों की गशà¥à¤¤ के लिठपà¥à¤²à¤¿à¤¸ का à¤à¤• अकेला करà¥à¤®à¤šà¤¾à¤°à¥€ सà¥à¤¬à¤¹ ऊà¤à¤Ÿ पे सवार हो निकलता है। उसके साथ थोडा पानी, कà¥à¤› खादà¥à¤¯ सामगà¥à¤°à¥€ , कà¥à¤› लेखनका साहितà¥à¤¯( जैसे कागज़ पेनà¥à¤¸à¤¿à¤² ) तथा लाठी आदि होता है।"मै जिन दिनों की बात कर रहा हूठ( और आजà¤à¥€), à¤à¤¾à¤°à¤¤ पाक सीमापे हर तरह की तसà¥à¤•री, अफीम गांजा,( या बारूद तथा हथियार à¤à¥€ हà¥à¤† करते थे ये à¤à¥€ सतà¥à¤¯ है.....जिसका उनके रहते घटी घटनामे उलà¥à¤²à¥‡à¤– नही था) ये सब शामिल था, और है।à¤à¤• बात धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ मे रखी जाय कि नशीले पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ की कारवाई करनेके लिठ,मौजूदा कानून के तहेत कà¥à¤› ख़ास नियम/बंधन होते हैं। पà¥à¤²à¤¿à¤¸ कांसà¥à¤Ÿà¥‡à¤¬à¤², हेड कांसà¥à¤Ÿà¥‡à¤¬à¤², या सब -इंसà¥à¤ªà¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤°, इनकी तहकीकात नही कर सकता। इन पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ की तसà¥à¤•री करनेवाले पे, पंचनामा करनेकी विधी à¤à¥€ अनà¥à¤¯ गà¥à¤¨à¤¾à¤¹à¥‹à¤‚ से अलग तथा काफी जटिल होती है।"उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने आगे कहा," जब à¤à¤• अकेला पà¥à¤²à¤¿à¤¸ करà¥à¤®à¥€ , ऊà¤à¤Ÿ पे सवार, मीलों फैले रेगिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¤®à¥‡ गशà¥à¤¤ करता है, तो उसके हाथ कà¤à¥€ कà¤à¤¾à¤° तसà¥à¤•र लगही जाता है। "क़ानूनन , जब कोई मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡à¤®à¤¾à¤² पकडा जाता है, तब मौक़ाये वारदात पेही( और ये बात हà¥à¤¤à¥à¤¯à¤¾ के केस के लिà¤à¤à¥€ लागू है ), à¤à¤• पंचनामा बनाना अनिवारà¥à¤¯ होता है। à¤à¤¸à¥‡ पंचनामे के लिà¤, उस गाà¤à¤µ के या मà¥à¤¹à¤²à¥à¤²à¥‡ के , कमसे कम दो 'इजà¥à¤œà¤¼à¤¤à¤¦à¤¾à¤°' वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ रहना ज़रूरी है।" शà¥à¤°à¥€ शेखावत ने पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ उठाया ," कोईà¤à¥€ मà¥à¤à¥‡ बताये , जहाठमीलों किसी इंसान या पानीका नामो निशाठतक न हो , वहाà¤, पञà¥à¤š कहाठसे उपलबà¥à¤§ कराये जाà¤à¤ ? ? तो लाज़िम है कि , पà¥à¤²à¤¿à¤¸à¤µà¤¾à¤²à¤¾ तसà¥à¤•रको पकड़ अपनेही ही ऊà¤à¤Ÿ पे बिठा ले। अनà¥à¤¯ कोई चारा तो होता ही नही। "उस तसà¥à¤•रको पकड़ रख, वो पà¥à¤²à¤¿à¤¸à¤•रà¥à¤®à¥€ सबसे निकटतम बसà¥à¤¤à¥€, जो २०/ २५ किलोमीटर à¤à¥€ हो सकती है, ले जाता है। वहाठलोगोंसे गिडगिडा के दो " इजà¥à¤œà¤¼à¤¤à¤¦à¤¾à¤° वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚" से इलà¥à¤¤à¤¿à¤œà¤¾ करता है। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पञà¥à¤š बनाता है। " अब कानूनन, पंचों को आà¤à¤–ों देखी हक़ीक़त बयान करनी होती है। लेकिन इसमे, जैसा à¤à¥€, वो पà¥à¤²à¤¿à¤¸à¤•रà¥à¤®à¥€ अपनी समà¤à¤•े अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बताता है, वही हक़ीक़त दरà¥à¤œ होती है।"पञà¥à¤š" à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ दासà¥à¤¤à¤¾à¤¨ पे हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° करते हैं, जिसके वो चशà¥à¤®à¤¦à¥€à¤¦ गवाह नही। लेकिन कानून तो कानून है ! बिना पंचानेमेके केस नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के आधीन होही नही सकता !!" खैर! पंचनामा बन जाता है। और तसà¥à¤•र या जोà¤à¥€ आरोपी हो, वो पà¥à¤²à¤¿à¤¸ हिरासतसे जलà¥à¤¦ छूट à¤à¥€ जता है। वजह ? उसके बेहद जानकार वकील महोदय उस पà¥à¤²à¤¿à¤¸ केस को कानून के तहेत गैरक़ानूनी साबित करते हैं!!!तांतà¥à¤°à¤¿à¤• दोष...A technical flaw !" ततà¥à¤ªà¤¶à¥à¤šà¥à¤¯à¤¾à¤¤, वो तसà¥à¤•र या आरोपी, फिर से अपना धंदा शà¥à¤°à¥‚ कर देता है। पà¥à¤²à¤¿à¤¸ पे ये बंधन होता है की ३ माह के à¤à¥€à¤¤à¤° वो अपनी सारी तहकीकात पूरी कर, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯à¤•ो सà¥à¤ªà¥à¤°à¥à¤¦ कर दे!! अधिकतर à¤à¤¸à¤¾à¤¹à¥€ होता है, येà¤à¥€ सच है ! फिर चाहे वो केस, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤²à¤¯ की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° १० साल बाद सà¥à¤¨à¤µà¤¾à¤ˆà¤•े लिठपेश हो या निपटाया जाय....!"अब सरकारी वकील और आरोपी का वकील, इनमे à¤à¤• लमà¥à¤¬à¥€, अंतहीन कानूनी जिरह शà¥à¤°à¥‚ हो जाती है...."फिर à¤à¤•बार वà¥à¤¯à¤‚ग कसते हà¥à¤ शà¥à¤°à¥€ शेखावत जी ने कहा," आदरणीय जज साहब ! à¤à¤• साधारण वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¥€à¤•ी कितनी लमà¥à¤¬à¥€ याददाशà¥à¤¤ हो सकती है ? २ दिन २ माह या २ सालकी ??कितने अरसे पूरà¥à¤µ की बात याद रखना मà¥à¤®à¤•िन है ??ये बेहद मà¥à¤¶à¥à¤•िल है कि कोईà¤à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¥€, चशà¥à¤®à¤¦à¥€à¤¦ गवाह होनेके बावजूद, किसीà¤à¥€ घटनाको तंतोतंत याद रखे !जब दो माह याद रखना मà¥à¤¶à¥à¤•िल है तब,१० सालकी कà¥à¤¯à¤¾ बात करें ??" (और कई बार तो गवाह मरà¤à¥€ जाते हैं!)" वैसेà¤à¥€ इन २ पंचों ने (!!) असलमे कà¥à¤› देखाही नही था! किसीके " कथित" पे अपने हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° किठथे ! उस "कथन" का à¤à¥‚ठसाबित करना, किसीà¤à¥€ वकील के बाà¤à¤ हाथका खेल है ! और वैसेà¤à¥€, कानून ने तहत, किसीà¤à¥€ पà¥à¤²à¤¿à¤¸ करà¥à¤®à¥€ के( चाहे वो कितà¥à¤¨à¤¾à¤¹à¥€ नेक और आला अफसर कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ न हो ,) मौजूदगी मे दिया गया बयान ,नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤²à¤¯ मे सà¥à¤¬à¥‚तके तौरपे गà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤¯ नही होता ! वो इक़à¥à¤¬à¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¥‡ जà¥à¤°à¥à¤® कहलाही नही सकता।( चाहे वो हà¥à¤¤à¥à¤¯à¤¾ का केस हो या अनà¥à¤¯ कà¥à¤›)।(IEA ) कलम २५ तथा २ॠ, के तहत, ये वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ ने १५० साल पूरà¥à¤µ कर रखी थी, अपने ख़à¥à¤¦ के बचाव के लिà¤,जो आजतक क़ायम है ! कोई बदलाव नही ! ज़ाहिरन, किसीà¤à¥€ पà¥à¤²à¤¿à¤¸ करमी पे, या उसकी बातपे विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ किया ही नही जा सकता à¤à¤¸à¤¾ क़ानून कहता है!! फिर à¤à¤¸à¥‡ केसका अंजाम कà¥à¤¯à¤¾ होगा ये तो ज़ाहिर है !""शमा"(यह शà¥à¤°à¥ƒà¤‚खला ’à¤à¤• सवाल तà¥à¤® करो" पर उपलबà¥à¤§ है. यहां शà¥à¤°à¥ƒà¤‚खला का केवल पहला à¤à¤¾à¤— ही दिया जा रहा है.)