धà¥à¤µà¤œ हूठमैं à¤à¤¾à¤°à¤¤ का ,मेरी छोटी सी है अà¤à¤¿à¤²à¤¾à¤·à¤¾,पूरà¥à¤£ करेंगे à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤¾à¤¸à¥€ à¤à¤¸à¥€ मà¥à¤à¤•ो है आशा।किंतॠइससे पहले की मैं ,बात करà¥à¤ अà¤à¤¿à¤²à¤¾à¤·à¤¾ की,कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ पनà¥à¤¨à¥‡ मैं खोलूठजो अतीत के है साकà¥à¤·à¥€à¥¤à¤œà¤¬ मेरा असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ नकार कर शतà¥à¤°à¥ थे à¤à¤¾à¤°à¤¤ आà¤,धोखे से थे गाà¤à¤µ, नगर और राजà¥à¤¯ हमारे हथियाà¤à¥¤ जब पूरे à¤à¤¾à¤°à¤¤ को बैरी, दास बनाकर के खà¥à¤¶ था,तब सचà¥à¤šà¥‡ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤¾à¤¸à¥€ को उसी दासता का दà¥à¤ƒà¤– था। à¤à¤¸à¥‡ में अगणित बलिदानों ने मà¥à¤à¤•ो जीवनदान दिया,जब मैं पहली बार पवन के à¤à¥‹à¤‚कों से लहराया था,मेरी आंखों में उस दिन ये पहला सपना आया था।मैंने देखा, देश में चारों ओर थी फैली हरियाली,à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤¾à¤¸à¥€ खà¥à¤¶ थे,बिखरी सà¤à¥€ ओर थी खà¥à¤¶à¤¹à¤¾à¤²à¥€à¥¤à¤ªà¤° जब मेरी आà¤à¤– खà¥à¤²à¥€ , मैं चकित हà¥à¤†, घबराया था,देखा चारों ओर थी हिंसा ,अनà¥à¤§à¤•ार सा छाया था ।सहसा मेरे मन में कà¥à¤› अà¤à¤¿à¤²à¤¾à¤·à¤¾ के अंकà¥à¤° फूटे,इचà¥à¤›à¤¾ है की जà¥à¤¡à¤¼ जाà¤à¤ जो सपने थे मेरे टूटे।सब à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤¾à¤¸à¥€ हैं à¤à¤¾à¤ˆ ,सà¤à¥€ इसी को सच माने ,à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ के लहराते आà¤à¤šà¤² को पावन जानें।नेता सोचें देश के में,निज हित से ऊपर जाà¤à¤,महाशकà¥à¤¤à¤¿ के किसी पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ में देश न हम अपना खोà¤à¤‚।आदर हो,समà¥à¤®à¤¾à¤¨ बड़ों का,बलिदानों का अरà¥à¤šà¤¨ हो,दà¥à¤µà¥‡à¤· à¤à¤¾à¤µ,कà¥à¤•रà¥à¤®,शतà¥à¤°à¥à¤¤à¤¾ का दृढ़ता से तरà¥à¤œà¤¨ हो। खेतों में गेंहू ही बोयें, रोपे नहीं हथियार,बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दें जà¥à¤žà¤¾à¤¨ की जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ मजदूरी का ले लें à¤à¤¾à¤° अपराधी को मिले सज़ा और दà¥à¤–ियों को इनà¥à¤¸à¤¾à¤« मिले।नारी जाति को आदर दें कहीं न कोई नार जले।à¤à¤¸à¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤ देश बनाओ जिस पर सब अà¤à¤¿à¤®à¤¾à¤¨ करें। पà¥à¤°à¥‡à¤®,à¤à¤•ता और समानता के ही अब तो दीप जलें,मानवता की औषधि से तà¥à¤® रोगी का उदà¥à¤§à¤¾à¤° करो।तà¥à¤® अपने शतà¥à¤°à¥à¤œà¤¨ पर à¤à¥€ बिना सोच उपकार करो,हिनà¥à¤¦à¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨ का à¤à¤‚डा हूठमैं नहीं कोई वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤°à¥€ हूà¤,अà¤à¤¿à¤²à¤¾à¤·à¤¾ परिपूरà¥à¤£ हà¥à¤ˆ तो मैं सबका आà¤à¤¾à¤°à¥€ हूà¤à¥¤(यह गीत मेरी परम मितà¥à¤° इसà¥à¤®à¤¤ जैदी का है। ख़ास बात यह है कि लंबे समय तक इसà¥à¤®à¤¤ केवल गदà¥à¤¯ की विधा में ही लिखती रहीं। तमाम आलेख और कहानियां उनके नाम पर दरà¥à¤œ हैं। लेकिन इधर कà¥à¤› समय से उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पदà¥à¤¯ की विधा में लिखना शà¥à¤°à¥‚ किया है और माशा अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ कà¥à¤¯à¤¾ खूब किया है। )